• Saturday, 24 August 2019

    चेरापूंजी में इतनी बारिश क्यों होती है

    चेरापुंजी   






      भारत के उत्तर-पूर्वी राज्य मेघालय  का एक शहर है। यह  शिलॉंग  से 53 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। यह स्थान दुनिया भर में मशहूर है। हाल ही में इसका नाम चेरापूंजी से बदलकर सोहरा रख दिया गया है। वास्तव में स्थानीय लोग इसे सोहरा नाम से ही जानते हैंरिमझिम बारिश में भीगना और बारिश के पानी में कागज की नावें तैराना तुम्हें जरूर अच्छा लगता होगा। बारिश हमारी धरती और पर्यावरण को पानी की आपूर्ति ही नहीं करती, यह मानव पशु-पक्षियों और पेड़-पौधों के लिए फायदेमंद भी है। लेकिन कभी-कभी बारिश विकराल रूप धारण कर लेती है और चारों ओर तबाही का कारण बन जाती है। चेरापूंजी का नाम सुनते ही दिमाग में पहले सबसे ज्यादा बारिश की बात आती है। यह जगह हमेशा बादलाें से घिरी रहती है।  जिसके सामने की ओर बांग्लादेश के मैदानी इलाके पड़ते हैं। यह पठार आसपास की घाटियों के ऊपर 600 मीटर की ऊंचाई पर है। ये मैदानों में 2 से 5 कि. मी. के सफ़र के भीतर ही अचानक समुद्र तल १३७० मी की ऊंचाई पर पहुँच जाते हैं. गहरी घाटियों वाली पहाड़ियों की जियोग्राफी कुछ ऐसी है कि नीचे-नीचे उड़ रहे वर्षा-बादल चेरापूजी के आसमान को अचानक भर देते हैं. हवाएं वर्षा बादलों को इन घाटियों से ऊपर की और तीखे ढलानों की और उठा देती हैं. तेजी से ऊपर ऊंचाई पर पहुंचे बादल तेजी से ठन्डे हो कर जम जाते हैं जिससे अचानक तेज बारिश हो जाती है.









    पर्वतीय संरचना 

    चेरापूंजी में वर्षा के लिए मुख्य रूप से यहाँ की पर्वतीय सरंचना को जिम्मेदार ठहराया जा सकता है। दक्षिण की ओर से पहाड़ियों की और उड़ते बदल घाटी में हवा के दबाव से तेजी पाते हैं। बादलों लम्बवत चेरापूंजी से टकराते हैं और बादल तेजी से ऊपर उठ जाते हैं। कोई आश्चर्य नहीं कि भारी वर्षा तब होती है जब हवाएं खासी हिल्स से सीध में टकराती हैं।

    मानसूनी हवाएं 

    चेरापूंजी में दक्षिण-पश्चिम और पूर्वोत्तर मानसूनी हवाएं दोनों और से आती हैं जिसके कारण एक लम्बा मानसून सीजन बन जाता है। यह खासी हिल्स के उस तरफ है जहां हवाओं का सबसे अधिक जोर रहता है। सर्दियों में यहाँ पूर्वोतर की ओर ब्रह्मपुत्र घाटी से आने वाली मानसून वर्षा लाती है।गर्मियों में बंगाल की खाड़ी से आने वाला मानसून बारिश लाता है। 









    मनमोहक दृश्य – 


    चेरापूंजी में गिरते पानी के फव्वारे, कुहासे का सामान एक अळग ही अनुभव देते हैं। यहां के लोगों को बसंत का शिद्दत से इंतजार होता है। यहां रहने वाली खासी जनजाति के लोग बादलों को लुभाने के लिए लोक गीत और लोक नृत्य का आयोजन करते हैं।

    जियोग्राफी 

    भारत में बारिश की राजधानी के तौर पर मशहूर चेरापूंजी की जियोग्राफी ऐसी है जिसकी वजह से नीचे उड़ रहे बादल इसके आसमान को भर देते हैं। यहां की हवाएं बादलों को घाटियों के ऊपर और तीखे ढलानों की ओर उठा देती है। इसके बाद ऊपर पहुंचे बादल तेजी से ठंडे होकर जम जाते हैं जिससे जोरों की बारिश होने लगती है।

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