• Sunday, 14 July 2019

    गर्मियों में घूमने के लिए सिलवासा जाए









    दादरा नगर हवेली की राजधानी सिलवासा जिसे लोग सिलवास के नाम से भी जानते हैं अरब सागर के पास स्थित भारतीय केंद्र संघ प्रशासित प्रदेश दादरा तथा नगर हवेली की राजधानी सिलवासा है इस शहर को पुर्तगाली शासन के दौरान विला डी पाको द अरकॉस के नाम से जाना जाता था 19 वीं सदी तक सिलवासा सिर्फ एक गुमनाम गांव था। 1885 में पुर्तगाली प्रशासन ने तय किया कि मुख्‍यालय को दरारा से सिलवासा में शिफ्ट कर दिया जाए। सिलवासा एक प्रसिद्ध गंतव्‍य स्‍थल है जहां पर्यटक प्रकृति के शानदार नजारों का लुत्‍फ उठा सकते है और पुर्तगाल की सांस्‍कृतिक विरासत की छाप भी देख सकते है।










    सिलवासा और उसके आसपास  की जगह 
      

     गिरजाघर

    सिलवासा के मध्यभाग में बसा हुआ यह छोटा सा गिरजाघर 1897 में बनवाया गया था। यह गिरजाघर शायद पुर्तुगालियों के साथ आए हुए केथलिक समुदायों के लिए निर्मित किया गया था। सिलवासा में स्थित यह एकमात्र गिरजाघर, पुर्तुगाली शासन काल के दौरान इस छोटे से शहर पर हुए अत्याचारों का जीता-जागता गवाह है।

    नक्षत्र वाटिका
    दमन गंगा नदी के किनारे पर बसी हुई यह नक्षत्र वाटिका हाल ही में बनाई गयी है जिसमें वनस्पतियों का रोपण नक्षत्रों या ग्रहों की स्थिति के अनुसार किया गया है। यहां पर कुछ वनस्पतियाँ ऐसी हैं जो हिंदुओं द्वारा पूजे जानेवाले नौ ग्रहों से संबंधित हैं। इसके अलावा यहां पर राशि-चक्र के 12 चिह्नों से संबंधित भी वनस्पतियाँ हैं जिनका रोपण ज्योतिषीय रेखा-चित्र के आकार में किया गया है। यहां पर वनस्पतियों से बनी एक वृत्ताकार संरचना है जिसमें डंडे के रूप में 27 वनस्पतियाँ लगाई गयी हैं जो प्रत्येक नक्षत्र से संबंधित हैं।








    हिरवा वन
     हिरवा वन यहां की पत्थरों की दीवार के लिए बहुत प्रसिद्ध है। देखने में यह दीवार थोड़ी देहाती सी नज़र आती है। कभी-कभी दिन के समय इस दीवार पर से पानी गिरता है, जिससे कि देखने वालों को वह एक प्रकृतिक झरने जैसा लगता है। इस उपवन में प्रवेश करते ही चंचलतापूर्वक यहां से वहां उड़ते हुए श्वेत पक्षियों के समूह ने मेरा स्वागत किया। सबसे बड़े अचरज की बात तो यहां पर उपस्थित व्यायामशाला के उपकरण थे जो हाल ही में स्थापित किए गए थे। सफ़ेद और हरे रंग के व्यायाम उपकरणों की यह लंबी पंक्ति बहुत ही आकर्षक लग रही थी। 

    स्वामीनारायण मंदिर

    भगवान श्री स्वामिनारायण सर्व अवतारों के अवतारी है। 3 अप्रैल 1781 को श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या के पास स्थित ग्राम छपिया में उनका इस पृथ्वी पर अवतरण हुआ।

     

    सिलवासा संग्रहालय









     


    सिलवासा संग्रहालय एक छोटा सा संग्रहालय है जो सिलवासा में स्थित पुर्तुगाली गिरजाघर के ठीक सामने खड़ा था। यहां पर कुछ चित्रावलियों और दैनिक जीवन में इस्तेमाल होनेवाली वस्तुओं के द्वारा वर्ली आदिवासी जाति के जीवन को दर्शाया गया है। वहां पर मौजूद एक बड़ा सा मुखौटा, जो शायद धार्मिक क्रियाओं के दौरान या फिर उत्सवों के लिए इस्तेमाल किया जाता होगा, मुझे सबसे अधिक दिलचस्प लगा। इसके अलावा वहां पर और एक चीज थी जो बहुत रोचक थी और वह थी मदिरा तयार करने के स्थानीय उपकरण, जो गोवा में फेणी का उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल होने वाले उपकरणों से काफी मिलते-झूलते थे।

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