• Saturday, 11 May 2019

    इस बार कम बारिश होने का डर अल-नीनी के कारण









    मौसम बिभाग ⥤ भारत में इस बार सामान्य से कम बारिश होने की आशंका है। मौसम का पूर्वानुमान लगाने वाली एक निजी एजेंसी स्काईमेट ने  कहा कि इस साल मानसून में 'सामान्य से कम बारिश' हो सकती है।  एजेंसी ने इसके लिए 'अल नीनो' के असर को जिम्‍मेदार ठहराया है। स्‍काईमेट का अनुमान अगर सही साबित होता है तो इससे देश में कृषि और आर्थिक विकास की संभावनाओं पर असर पड़ सकता है, जहां कृषि का एक बड़ा हिस्‍सा मानसूनी बारिश पर निर्भर करता है।







    मौसम का अनुमान जताने वाली आस्ट्रेलिया की सरकारी एजेंसी 'ब्यूरो ऑफ मेट्रोलॉजी' ने इस साल अल नीनो की 70 फीसदी आशंका जताई है. इसी तरह से अमेरिकी वेदर एजेंसी 'क्लाइमेट प्रेडिक्शन सेंटर'  ने भी अल नीनो की 60 फीसदी आशंका जताई है .स्‍काईमेट  के अनुमान के अनुसार, प्रशांत महासगर में गर्माहट सामान्‍य से ज्‍यादा है। इसके चलते मार्च से मई के बीच अल-नीनो का असर 80 प्रतिशत तक रह सकता है। वहीं, जून से अगस्‍त के बीच इसमें गिरावट आने और इसके 60 प्रतिशत तक पहुंचने की थोड़ी संभावना है।









    इसका मतलब यह हुआ कि इस साल पूरे मानसून सीजन में अल नीनो का असर बरकरार रहेगा, जिसके चलते कम बारिश होगी।
    प्रशांत महासागर में समुद्री सतह के गर्म हो जाने की घटना को अल-नीनो कहते हैं। इसकी शुरुआत दिसंबर महीने से होती है। इससे हवाओं का न केवल रुख बदल जाता है, बल्कि इसकी रफ्तार भी परिवर्तित हो जाती है

    देश में आमतौर पर अगस्त से लेकर सितंबर तक सबसे ज्यादा (करीब 70 फीसदी) बारिश होती है। ब्यूरो ने अपने पिछले पूर्वानुमान में अल नीनो प्रभाव की 50 प्रतिशत आशंका जताई थी। हालांकि, मौसम की भविष्यवाणी करने वाली भारतीय एजेंसियों का कहना है कि मानसून की बारिश पर अल नीनो के असर की आशंका नहीं है।

     

     

     

































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