• Saturday, 20 April 2019

    कर्नाटक का अनोखा गांव









    कोई ऐसा व्यक्ति मिला हो जोआम बोलचाल में संस्कृत भाषा का इस्तेमाल करता हो, आज संस्कृत का अस्तित्व सिर्फ धार्मिक किताबों और ग्रंथों तक ही सीमित है। देव वाणी बोली जानेवाली संस्कृत भाषा आज हिंदी और अंग्रेज़ी की भीड़ में कहीं पीछे छूट गई है।  लेकिन कर्नाटक में एक ऐसा गाँव है जहां का हर बच्चा आज भी संस्कृत बोलता है। उस गाँव का नाम है मत्तुर जो शिवमोग्गा शहर के पास स्थित है। 








     इस गाँव में कुल करीब ३०० परिवार रहते हैं और यहां की जनसंख्या करीब 2800 है। इस गांव में संस्कृत प्राचीनकाल से ही बोली जाती है। यह कहना सही होगा कि पौराणिक भारत को या कम से कम पौराणिक भारत कि कुछ चीज़ों को इस जगह ने बहुत ही महफूज़ तरीके से संजोए रखा है। मत्तुर गाँव पाठशाला के छात्र साल दर साल अच्छे नंबर प्राप्त कर शिक्षण क्षेत्र में इस गाँव का पद कर्नाटक के बाकी गाँवों से ऊंचा बनाए रखने में कामयाब रहे हैंबच्चे, बूढ़े, युवा और महिलाएं- सभी बहुत ही सहज रूप से संस्कृत में बात करते हैं।
    गांव में रहने वाले मुस्लिम परिवार के लोग भी  संस्कृत उतनी ही सहजता से बोलते हैं जैसे दूसरे लोग। इस गांव के बच्चे क्रिकेट खेलते हुए और आपस में झगड़ते हुए भी संस्कृत में ही बातें करते हैं। गांव में संस्कृत में बोधवाक्य लिखा नजर आता है। मार्गे स्वच्छता विराजते। ग्रामे सुजना: विराजते।एक और दिलचस्प बात यह कि मत्तूरु गांव के घरों की दीवारों पर संस्कृत ग्रैफीटी पाई जाती है. दीवारों पर पेंट किए गए प्राचीन स्लोगन्स जैसे मार्गे स्वाच्छताय विराजाते, ग्राम सुजानाह विराजन्ते पाए जाते है, जिसका अर्थ है: एक सड़क के लिए स्वच्छता उतनी ही महत्वपूर्ण है जितना की अच्छे लोग गाँव के लिए. कुछ घरों के परिवारों के दरवाजे पर "आप इस घर में संस्कृत बोल सकते हैं" काफी गर्व से लिखा होता हैं. यह गांव गमाका कहानी कहने की अनोखी और प्राचीन परंपरा का भी समर्थन करता है. 








    मत्तूरु इतना खास गाँव क्यों है जब कि देश की आबादी का 1% से भी कम लोग संस्कृत भाषा में संवाद करते है, न केवल ग्रामीणों ने अपने दैनिक जीवन में भाषा का इस्तेमाल किया बल्कि वे लोगों को सिखाने में भी दिलचस्पी रखते है और पढ़ाने के लिए भी तैयार रहते हैं. आने वाले वर्षों में उनका प्रशंसनीय प्रयास लंबे समय तक इस प्राचीन भाषा को जीवित रखेगा.इस गांव के कई युवक व युवतियां आईटी इंजीनियर" हैं और बाहर काम करते हैं। विदेशों से भी अनेक व्यक्ति यहां संस्कृत सीखने आते हैं

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