• Saturday, 20 April 2019

    मुगल कालीन वास्तुकलाके नायब नमूने क्या है









    दिल्ली की वास्तुकला का वास्तविक गौरव मुग़ल कालीन है दिल्ली में हुमायूँ का मक़बरा मुग़ल वास्तुकला का प्रथम महत्त्वपूर्ण नमूना हैमुगल वास्तुकला, जो कि भारतीय, इस्लामी एवं फारसी वास्तुकला का मिश्रण है, एक विशेष शैली, जो कि मुगल भारत में 16वीं 17वीं एवं 18वीं सदी में लाए|मुगल वास्तुकला का चरम ताजमहल है। मुगल वास्तुकला का विकास एक कर्मिक विकास है। शाहजहां के काल को मुगल वास्तुकला का स्वर्णकाल कहा जाता है।

    पुराना किला 
    नई दिल्ली में यमुना नदी के किनारे स्थित प्राचीन दीना-पनाह नगर का आंतरिक किला है। इस किले का निर्माण शेर शाह सूरी ने अपने शासन काल में 1538 से 1545 के बीच करवाया था। किले के तीन बड़े द्वार हैं तथा इसकी विशाल दीवारें हैं। इसके अंदर एक मस्जिद है जिसमें दो तलीय अष्टभुजी स्तंभ है। हिन्दू साहित्य के अनुसार यह किला इंद्रप्रस्थ के स्थल‍ पर है








    ताजमहल
    ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है  इसकी वास्तु शैली फ़ारसी, तुर्क, भारतीय और इस्लामी वास्तुकला के घटकों का अनोखा सम्मिलन है। सन् १९८३ में, ताजमहल युनेस्को विश्व धरोहर स्थल बना। इसके साथ ही इसे विश्व धरोहर के सर्वत्र प्रशंसा पाने वाली, अत्युत्तम मानवी कृतियों में से एक बताया गया। ताजमहल को भारत की इस्लामी कला का रत्न भी घोषित किया गया है।

    बुलंद दरवाजा








    बुलंद दरवाजा़ मुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है  आगरा शहर से ४३ किमी दूर फतेहपुर सीकरी नामक स्थान पर स्थित एक दर्शनीय स्मारक है। इसका निर्माण अकबर ने १६०२ में करवाया था। बुलन्द शब्द का अर्थ महान या ऊँचा है। अपने नाम को सार्थक करने वाला यह स्मारक विश्व का सबसे बडा़ प्रवेशद्वार है। हिन्दू और फारसी स्थापत्य कला का अद्भुत उदाहरण होने के कारण इसे "भव्यता के द्वार" नाम से भी जाना जाता है। अखबार पर विजय प्राप्त करने की स्मृति में बनवाए गए इस प्रवेशद्वार के पूर्वी तोरण पर फारसी में शिलालेख अंकित हैं जो १६०१ में दक्कन पर अकबर की विजय के अभिलेख हैं। ४२ सीढ़ियों के ऊपर स्थित बुलन्द दरवाज़ा ५३.६३ मीटर ऊँचा और ३५ मीटर चौडा़ है। यह लाल बलुआ पत्थर से बना है जिसे सफेद संगमरमर से सजाया गया है। दरवाजे के आगे और स्‍तंभों पर कुरान की आयतें खुदी हुई हैं। यह दरवाजा एक बड़े आँगन और जामा मस्जिद की ओर खुलता है।

    आगरा
    आगरा के सिकंदरा इलाके में स्थित है मुग़ल सम्राट अकबर महान का मकबरा जो तात्कालीन वास्तुकला का एक नायाब नमूना भी है, लेकिन बहुत काम लोग इस तथ्य को जानते हैं कि इस मकबरे में अकबर महान के अवशेष मौजूद नहीं हैं. न ही वहां तत्कालीन समय में मौजूद रत्नजड़ित पत्थरों, आभूषण तथा नायब बहुमूल्य कालीनों में से कुछ शेष बचा है.

    जहाँगीर महल







    आगरा किले में स्थित जहाँगीर महल का निर्माण अकबर ने कराया था। आगरा किले में यह सबसे बड़ा आवासीय भवन है। इस भवन में हिन्दू और मुग़ल वास्तुकला का बहतरीन मिश्रण देखने को मिलता  

    एतमादुद्दौला का मकबरामुग़ल
    नूरजहां ने अपने पिता की स्मृति में आगरा में एतमादुद्दौला का मकबरा बनवाया था। एतमादुद्दौला का मकबरामुग़ल वास्तुकला का उत्कृष्ट नमूना है  मुगल काल के अन्य मकबरों से अपेक्षाकृत छोटा होने से, इसे कई बार श्रंगारदान भी कहा जाता है। यहां के बाग, पीट्रा ड्यूरा पच्चीकारी, व कई घटक ताजमहल से मिलते हुए हैं।








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