• Tuesday, 12 February 2019

    दिल्ली की सबसे डरावनी जगह

    दिल्ली कैंट 







    दिल्ली के कैंट में सन्नाटा रहता है रात के वक़्त यहां कई बार भूत देखे गए हैं. कार से जाते लोगों को सफ़ेद साड़ी में एक औरत सुनसान सड़क पर चलते नज़र आती है. इस इलाके से रात के वक़्त न ही गुज़रें तो बेहतर है नहीं तो कहीं आपका भी किसी मुसीबत में ना पड़ जाये 

    दिल्ली के रोहिनी







                                   
     दिल्ली के रोहिनी में मौजूद ये नदी हर किसी को अपने अंदर खींच लेती है. इसी वजह से इसका नाम खूनी नदी पड़ा है

                                                                  
    फिरोज शाह कोटला किला

     आसपास की लोगों की मानें तो हर गुरुवार यहां मोमबत्तियां और अगरबत्ती जलती दिखती है। और तो और, अगले दिन किले के कुछ हिस्सों में कटोरे में दूध और कच्चा अनाज भी रखा मिलता है।   इस किले को 1354 में फिरोज शाह तुगलक ने  बनवाया था  यह किला आज खंडहर हो चुका है। 

    कश्मीरी गेट

    कश्मीरी गेट का म्यूटिनी हाउस में 1857 को मारे गए सिपाहियों की याद में अंग्रेजों ने बनवाया था। हां, यादें और साए अभी भी इस इमारत के आसपास रहते हैं। इसलिए इसे डरावना माना जाता है। 
       
    संजय वन









    दिल्ली का यह जंगल भी भूतों से नहीं बच पाया है। इस जंगल में बहुत से पुराने बरगद के पेड़ हैं इसलिये यहां पर आने वाल कई शिकारी बताते हैं कि उन्‍होंने एक औरत को सफेद कपड़ों में बरगद के पेड़ के पीछे छुपते हुए देखा है। इसके अलावा भी ऐसे कई किस्से है है जो यहाँ लोगो में प्रचलित है जैसे रात में रोशनियों का दिखना, ऐसा आभास होना जैसे कोई पीछे आ रहा है | ऐसे में लोगो के बीच में बैठे हुए डर का कई लोग फायदा उठाने से भी नहीं चुकते इसीलिए रात में इधर जाने को मना किया जाता है |

    लोथियन सेमेट्री


    यह इसाइयों का कब्रिस्तान है जहां पर कई तरह के भूतों की कहानियां प्रचलित है, जैसे सिर कटे हुए भूत की। बताया जाता है कि यह भूत अपने जमाने में एक जवान सिपाही था जिसकी प्रेमिका ने इसको ठुकरा दिया था जिस वजह से इसने अपना सिर काट लिया। अब यह भूत अमावस्या की रात में यहां ठहलता है। इसके अलावा कई तरह की आवाजे आना, किसी का अचानक पीछे से आवाज देना जैसी घटनाओं की शिकायते भी यहाँ सुनने को मिलती रहती है |
    खूनी दरवाजा










    यहीं बहादुर शाह जफर के तीन बेटों को अंग्रेजों ने मार डाला था। कहते हैं, तभी से तीनों शहज़ादे इसी इलाके में साया बनकर मौजूद रहते हैं।

                        

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