• Tuesday, 30 October 2018

    दीपावली


     भारत देश त्योहारों का देश है । ये त्योहार जीवन और जाति में प्राणों का संचार करते हैं ।








    त्योहार हमारे नीरस जीवन को आनन्द और उमंग से भरदेते हैं ये हमारे सांस्कृतिक परम्परा, धार्मिक भावना, राष्ट्रीयता, सामाजिकता तथा एकता की कड़ी के समान हैं ।
    दीवाली उन  त्योहारो  में से एक है दीवाली के इस मधुर पर्व के साथ अनेक प्रकार की कहानियां जुड़ी हैं ।दीवाली से सम्बन्धित सभी कहानियां दीवाली नामक पर्व का महत्त्व बताती हैं । दीवाली स्वच्छता का भी प्रतीक है । छोटे-बड़े, धनी-निर्धन सब इस पर्व को पूरे उत्साह से मनाते हैं । दीवाली की रात्रि का दृश्य अनुपम होता है  बच्चे पटके चलाकर अपनी प्रसन्नता का परिचय देते हैं व्यापारी लोग इस दिन को बड़ा शुभ मानते हैं । वे इस दिन अपनी बहियां बदलते हैं तथा नया व्यापार शुरू करते हैं । यह पर्व एकत्व का भी प्रतीक है । सभी धर्मो के लोग इस पर्व को समान निष्ठा के साथ मनाते है दीपावली के दिन ही भगवान श्रीराम 14 वर्ष का वनवास काटकर अयोध्या वापस लौटे थे। श्रीराम का स्वागत सत्कार करने के लिए अयोध्या के निवासियों ने घी के दीपक जलाए थे। हिंदी कैलेंडर के अनुसार नया वर्ष दीपावली के दिन शुरू होता है। यह त्यौहार बुराई पर अच्छाई, अंधकार पर प्रकाश और अज्ञान पर ज्ञान की विजय को दिखाता है।







     दीपावली मानाने का तरीका 
     
     इस त्योहार के आने के कई दिन पहले से ही घरों की लिपाई-पुताई, सजावट प्रारंभ हो जाती है।  नए कपड़े बनवाए जाते हैं, मिठाइयां बनाई जाती हैं। लक्ष्मी जी के आगमन में चमक-दमक की जाती है। धनतेरस से भाई दूज तक यह त्योहार चलता है। पांच दिनों तक यह त्योहार मानते है धनतेरस के दिन व्यापार  अपने बहीखाते नए बनाते हैं। इस दिन हजारों लोग सोने के गहने, बर्तन, कपड़े और दूसरी चीजें खरीदते हैं। दुकानदारों और व्यापारियों के लिए यह त्यौहार प्रमुख है अगले दिन नरक चौदस के दिन सूर्योदय से पूर्व स्नान करना अच्‍छा माना जाता है। अमावस्या के दिन लक्ष्मीजी की पूजा की जाती है। घर की स्त्रियां इस दिन रंगोली सजाती हैं। दीपावली का त्योहार सभी के जीवन को खुशी प्रदान करता है। नया जीवन जीने का उत्साह प्रदान करता है।

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